«हे चरणो, वृन्दावन चलो! हे नेत्रो, इस सौन्दर्य को निहारो! हे जिह्वे, इसकी महिमा गाओ! हे देह, इसी धूल में प्रेम-विह्वल होकर लोटो!»
— वृन्दावन-महिमामृत, 17.7
«हमें व्रज से प्रेम है और हम इस पवित्र भूमि तथा इसके निवासियों की सेवा का प्रयास करते हैं। व्रजपीडिया श्री श्री राधा-गोविन्द की लीला-स्थली की महिमा गाने का हमारा एक और विनम्र प्रयास है।»